Fasla
सदियां पार करगये हैं अभी,
सदियों का फासला बाक़ी हैं,
कोई चला हमसफ़र को साथ लियें,
कोई अकेलाही चल दिया हैं;
की गयी गलतियों का,
इतिहास गवाह हैं,
आने वाली गलतियों को,
भविष्य ताक रहा हैं;
शोर सारा मन में हैं,
मुख पे छाया सन्नाटा हैं,
क्रोध, लोभ के साये में पली,
झूठीं ऊपरी मुस्कान हैं;
अंधेरी इस दुनिया मैं,
आशाओं का एक कोना भी हैं,
जहाँ समय के लिए और समय के प्रति,
निष्ठा एवं अभिमान हैं;
हो चाहे कैसा भी वर्तमान,
सदिया पार कर गये हैं अभी,
सदियों का फासला बाकी हैं,
-AEM KAY

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