Wednesday, 7 December 2016

Fasla


          Fasla

सदियां पार करगये हैं अभी,
सदियों का फासला बाक़ी हैं,
कोई चला हमसफ़र को साथ लियें,
कोई अकेलाही चल दिया हैं;

की गयी गलतियों का,
इतिहास गवाह हैं,
आने वाली गलतियों को,
भविष्य ताक रहा हैं;

शोर सारा मन में हैं,
मुख पे छाया सन्नाटा हैं,
क्रोध, लोभ के साये में पली,
झूठीं ऊपरी मुस्कान हैं;

अंधेरी इस दुनिया मैं,
आशाओं का एक कोना भी हैं,
जहाँ समय के लिए और समय के प्रति,
निष्ठा एवं अभिमान हैं;

हो चाहे कैसा भी वर्तमान,
चक्र तो चलता राहा हैं,
सदिया पार कर गये हैं अभी,
सदियों का फासला बाकी हैं,
                         
                               -AEM KAY

No comments:

Post a Comment