Friday, 28 April 2017

karz

संभले थे कभी,
गिर अब पड़े  हैं,
जवाबो को खोजते,
प्रश्नो का जाल बुन चले हैं;

अभिमानी थे कभी,
मज़ाक तो अब बना हैं,
गैरो पे हस्ते थे कभी,
सीने का दर्द अब पता चला हैं;

सरहदे पार गए थे,
सरहदे मुल्ख में बना गये,
स्वाभिमान से जो लौ जलाई थी कभी,
आज उसे ही बुझा गये;

खोजने खुद को गये थे,
अंतर्मन खो आये,
क़र्ज़ जिस माटी का था,
उसे ही छोड़ आये.

                -AEM KAY.

Tuesday, 4 April 2017

आनंद

    "आनंद"

हर ख़ुशी में आपके ,
गम का एक तिनका हैं ,
भुलाये उस हर गम को आपने,
 मुस्कुराना सिखाया हैं,

पता हुए भी अंजाम आप,
कोशिशो से हटे नहीं,
ज़िन्दगी जो बाकि थी जरासी,
उसे रोतें हुए जियें नहीं;

जब मन किया आपका,
दिल खोल कर हस पडें,
आंसुओं की बात आई जब,
दिल का वो बंद दरवाजा खोला नहीं;

दिल करता हैं रोदू फुटकर,
जब अब आप हमारे बीच नहीं,
पर मुस्कुरादेते हैं सुनकर,
आनंद मरा नहीं,
आनंद मरते नहीं;

        -मुकेश (AEM KAY) कुमरे.